26 दिसंबर 2026 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 26 दिसंबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 26 दिसंबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (17:35 तक), नक्षत्र पुष्य (17:43 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 17:11 पर है। राहुकाल 09:14 से 10:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 17:11
रात 06:35 तक
तिथि
तृतीया, 17:35 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पुष्य, 17:43 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 17:35 तक
कृष्ण चतुर्थी 14:43, 27 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 17:43 तक
आश्लेषा 15:34, 27 दिस॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 21:52 तक
विष्कंभअशुभ 18:23, 27 दिस॰ तक
करण
वणिज 07:12 तक
विष्टि (भद्रा) 17:35 तक
बव 04:05, 27 दिस॰ तक
बालव 14:43, 27 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
17:11
चंद्रोदय
19:58
चंद्रास्त
08:44
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
09:14 – 10:34
यमगंड
13:13 – 14:32
गुलिक काल
06:35 – 07:54

26 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:35 – 07:54टालें
शुभ07:54 – 09:14शुभ
रोग09:14 – 10:34टालें
उद्वेग10:34 – 11:53टालें
चर11:53 – 13:13सामान्य
लाभ13:13 – 14:32शुभ
अमृत14:32 – 15:52शुभ
काल15:52 – 17:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:11 – 18:52शुभ
उद्वेग18:52 – 20:32टालें
शुभ20:32 – 22:13शुभ
अमृत22:13 – 23:53शुभ
चर23:53 – 01:34सामान्य
रोग01:34 – 03:14टालें
काल03:14 – 04:55टालें
लाभ04:55 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3507:28दिन
गुरु07:2808:21दिन
मंगल08:2109:14दिन
सूर्य09:1410:07दिन
शुक्र10:0711:00दिन
बुध11:0011:53दिन
चंद्र11:5312:46दिन
शनि12:4613:39दिन
गुरु13:3914:32दिन
मंगल14:3215:25दिन
सूर्य15:2516:18दिन
शुक्र16:1817:11दिन
बुध17:1118:18रात
चंद्र18:1819:25रात
शनि19:2520:32रात
गुरु20:3221:39रात
मंगल21:3922:46रात
सूर्य22:4623:53रात
शुक्र23:5301:00रात
बुध01:0002:07रात
चंद्र02:0703:14रात
शनि03:1404:21रात
गुरु04:2105:28रात
मंगल05:2806:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2340° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।