27 दिसंबर 2026 को रियाद का पंचांग

रविवार, 27 दिसंबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 27 दिसंबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (14:43 तक), नक्षत्र आश्लेषा (15:34 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 15:52 से 17:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 17:12
रात 06:36 तक
तिथि
चतुर्थी, 14:43 तक
पंचमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 15:34 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 दिसंबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 14:43 तक
कृष्ण पंचमी 12:28, 28 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 14:03, 28 दिस॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 18:23 तक
प्रीति 15:25, 28 दिस॰ तक
करण
बालव 14:43 तक
कौलव 01:31, 28 दिस॰ तक
तैतिल 12:28, 28 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 15:34 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
21:04
चंद्रास्त
09:28
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
15:52 – 17:12
यमगंड
11:54 – 13:13
गुलिक काल
14:33 – 15:52

27 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:35 – 07:55टालें
चर07:55 – 09:14सामान्य
लाभ09:14 – 10:34शुभ
अमृत10:34 – 11:54शुभ
काल11:54 – 13:13टालें
शुभ13:13 – 14:33शुभ
रोग14:33 – 15:52टालें
उद्वेग15:52 – 17:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:12 – 18:53शुभ
अमृत18:53 – 20:33शुभ
चर20:33 – 22:13सामान्य
रोग22:13 – 23:54टालें
काल23:54 – 01:34टालें
लाभ01:34 – 03:15शुभ
उद्वेग03:15 – 04:55टालें
शुभ04:55 – 06:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3507:28दिन
शुक्र07:2808:21दिन
बुध08:2109:14दिन
चंद्र09:1410:07दिन
शनि10:0711:01दिन
गुरु11:0111:54दिन
मंगल11:5412:47दिन
सूर्य12:4713:40दिन
शुक्र13:4014:33दिन
बुध14:3315:26दिन
चंद्र15:2616:19दिन
शनि16:1917:12दिन
गुरु17:1218:19रात
मंगल18:1919:26रात
सूर्य19:2620:33रात
शुक्र20:3321:40रात
बुध21:4022:47रात
चंद्र22:4723:54रात
शनि23:5401:01रात
गुरु01:0102:08रात
मंगल02:0803:15रात
सूर्य03:1504:22रात
शुक्र04:2205:29रात
बुध05:2906:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2340° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।