26 दिसंबर 2024 को सिएटल का पंचांग

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (11:14 तक), नक्षत्र विशाखा (06:58, 27 दिस॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 07:56 पर और सूर्यास्त 16:23 पर है। राहुकाल 13:13 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 07:56 – 16:23
रात 07:57 तक
तिथि
एकादशी, 11:14 तक
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा, 06:58 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 दिसंबर 2024 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 11:14 तक
कृष्ण द्वादशी 12:57, 27 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 06:58, 27 दिस॰ तक
अनुराधा 08:43, 28 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 08:53 तक
धृति 09:07, 27 दिस॰ तक
करण
बालव 11:14 तक
कौलव 00:10, 27 दिस॰ तक
तैतिल 12:57, 27 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 00:26, 27 दिस॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:56
सूर्यास्त
16:23
चंद्रोदय
03:59
चंद्रास्त
13:06
दिनमान
8h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:52 – 06:54
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
13:13 – 14:17
यमगंड
07:56 – 09:00
गुलिक काल
10:03 – 11:06

26 दिसंबर 2024 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:56 – 09:00शुभ
रोग09:00 – 10:03टालें
उद्वेग10:03 – 11:06टालें
चर11:06 – 12:10सामान्य
लाभ12:10 – 13:13शुभ
अमृत13:13 – 14:17शुभ
काल14:17 – 15:20टालें
शुभ15:20 – 16:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:23 – 18:20शुभ
चर18:20 – 20:17सामान्य
रोग20:17 – 22:13टालें
काल22:13 – 00:10टालें
लाभ00:10 – 02:07शुभ
उद्वेग02:07 – 04:03टालें
शुभ04:03 – 06:00शुभ
अमृत06:00 – 07:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:5608:39दिन
मंगल08:3909:21दिन
सूर्य09:2110:03दिन
शुक्र10:0310:45दिन
बुध10:4511:28दिन
चंद्र11:2812:10दिन
शनि12:1012:52दिन
गुरु12:5213:34दिन
मंगल13:3414:17दिन
सूर्य14:1714:59दिन
शुक्र14:5915:41दिन
बुध15:4116:23दिन
चंद्र16:2317:41रात
शनि17:4118:59रात
गुरु18:5920:17रात
मंगल20:1721:34रात
सूर्य21:3422:52रात
शुक्र22:5200:10रात
बुध00:1001:28रात
चंद्र01:2802:45रात
शनि02:4504:03रात
गुरु04:0305:21रात
मंगल05:2106:39रात
सूर्य06:3907:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 दिस॰ 2024कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 दिस॰ 2024प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 दिस॰ 2024पौष अमावस्याअमावस्या
3 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
13 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2061° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।