30 जनवरी 2025 को सिएटल का पंचांग

गुरुवार, 30 जनवरी 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

गुरुवार, 30 जनवरी 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (00:29, 31 जन॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (16:20 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 07:37 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 13:34 से 14:45 तक है।

दिन और रात
दिन 07:37 – 17:08
रात 07:36 तक
तिथि
द्वितीया, 00:29 तक
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 16:20 तक
शतभिषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जनवरी 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 00:29, 31 जन॰ तक
शुक्ल तृतीया 22:08, 31 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:44, 31 जन॰ तक
योग
वरीयान 02:02, 31 जन॰ तक
परिघअशुभ 22:54, 31 जन॰ तक
करण
बालव 13:36 तक
कौलव 00:29, 31 जन॰ तक
तैतिल 11:19, 31 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:37
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
08:37
चंद्रास्त
18:49
दिनमान
9h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:41 – 06:39
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
13:34 – 14:45
यमगंड
07:37 – 08:49
गुलिक काल
10:00 – 11:11

30 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:37 – 08:49शुभ
रोग08:49 – 10:00टालें
उद्वेग10:00 – 11:11टालें
चर11:11 – 12:22सामान्य
लाभ12:22 – 13:34शुभ
अमृत13:34 – 14:45शुभ
काल14:45 – 15:56टालें
शुभ15:56 – 17:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:08 – 18:56शुभ
चर18:56 – 20:45सामान्य
रोग20:45 – 22:33टालें
काल22:33 – 00:22टालें
लाभ00:22 – 02:10शुभ
उद्वेग02:10 – 03:59टालें
शुभ03:59 – 05:47शुभ
अमृत05:47 – 07:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:3708:25दिन
मंगल08:2509:12दिन
सूर्य09:1210:00दिन
शुक्र10:0010:47दिन
बुध10:4711:35दिन
चंद्र11:3512:22दिन
शनि12:2213:10दिन
गुरु13:1013:58दिन
मंगल13:5814:45दिन
सूर्य14:4515:33दिन
शुक्र15:3316:20दिन
बुध16:2017:08दिन
चंद्र17:0818:20रात
शनि18:2019:32रात
गुरु19:3220:45रात
मंगल20:4521:57रात
सूर्य21:5723:09रात
शुक्र23:0900:22रात
बुध00:2201:34रात
चंद्र01:3402:47रात
शनि02:4703:59रात
गुरु03:5905:11रात
मंगल05:1106:24रात
सूर्य06:2407:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2074° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।