6 सितंबर 2025 को सिएटल का पंचांग

शनिवार, 6 सितंबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शनिवार, 6 सितंबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (13:11 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (10:25 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 19:38 पर है। राहुकाल 09:51 से 11:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 19:38
रात 06:36 तक
तिथि
चतुर्दशी, 13:11 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
धनिष्ठा, 10:25 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 13:11 तक
पूर्णिमा 11:08, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:11, 7 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 20:52 तक
धृति 18:00, 7 सित॰ तक
करण
वणिज 13:11 तक
विष्टि (भद्रा) 00:13, 7 सित॰ तक
बव 11:08, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
19:38
चंद्रोदय
19:23
चंद्रास्त
05:04
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:40 – 13:33

अशुभ समय

राहुकाल
09:51 – 11:29
यमगंड
14:44 – 16:22
गुलिक काल
06:35 – 08:13

6 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:35 – 08:13टालें
शुभ08:13 – 09:51शुभ
रोग09:51 – 11:29टालें
उद्वेग11:29 – 13:07टालें
चर13:07 – 14:44सामान्य
लाभ14:44 – 16:22शुभ
अमृत16:22 – 18:00शुभ
काल18:00 – 19:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:38 – 21:01शुभ
उद्वेग21:01 – 22:23टालें
शुभ22:23 – 23:45शुभ
अमृत23:45 – 01:07शुभ
चर01:07 – 02:29सामान्य
रोग02:29 – 03:52टालें
काल03:52 – 05:14टालें
लाभ05:14 – 06:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3507:40दिन
गुरु07:4008:45दिन
मंगल08:4509:51दिन
सूर्य09:5110:56दिन
शुक्र10:5612:01दिन
बुध12:0113:07दिन
चंद्र13:0714:12दिन
शनि14:1215:17दिन
गुरु15:1716:22दिन
मंगल16:2217:28दिन
सूर्य17:2818:33दिन
शुक्र18:3319:38दिन
बुध19:3820:33रात
चंद्र20:3321:28रात
शनि21:2822:23रात
गुरु22:2323:18रात
मंगल23:1800:12रात
सूर्य00:1201:07रात
शुक्र01:0702:02रात
बुध02:0202:57रात
चंद्र02:5703:52रात
शनि03:5204:46रात
गुरु04:4605:41रात
मंगल05:4106:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
10 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2158° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।