7 नवंबर 2025 को सिएटल का पंचांग

शुक्रवार, 7 नवंबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शुक्रवार, 7 नवंबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (18:02 तक), नक्षत्र रोहिणी (11:03 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 16:42 पर है। राहुकाल 10:40 से 11:52 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 16:42
रात 07:04 तक
तिथि
तृतीया, 18:02 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 11:03 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 18:02 तक
कृष्ण चतुर्थी 14:56, 8 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:03 तक
मृगशिरा 08:32, 8 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 08:57 तक
शिव 05:01, 8 नव॰ तक
सिद्ध 01:32, 9 नव॰ तक
करण
वणिज 07:46 तक
विष्टि (भद्रा) 18:02 तक
बव 04:25, 8 नव॰ तक
बालव 14:56, 8 नव॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 21:44 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
16:42
चंद्रोदय
17:59
चंद्रास्त
10:22
दिनमान
9h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
10:40 – 11:52
यमगंड
14:17 – 15:29
गुलिक काल
08:15 – 09:27

7 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:03 – 08:15सामान्य
लाभ08:15 – 09:27शुभ
अमृत09:27 – 10:40शुभ
काल10:40 – 11:52टालें
शुभ11:52 – 13:05शुभ
रोग13:05 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:29टालें
चर15:29 – 16:42सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:42 – 18:30टालें
काल18:30 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 22:05शुभ
उद्वेग22:05 – 23:53टालें
शुभ23:53 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 03:29शुभ
चर03:29 – 05:16सामान्य
रोग05:16 – 07:04टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0307:51दिन
बुध07:5108:39दिन
चंद्र08:3909:27दिन
शनि09:2710:16दिन
गुरु10:1611:04दिन
मंगल11:0411:52दिन
सूर्य11:5212:41दिन
शुक्र12:4113:29दिन
बुध13:2914:17दिन
चंद्र14:1715:05दिन
शनि15:0515:54दिन
गुरु15:5416:42दिन
मंगल16:4217:54रात
सूर्य17:5419:06रात
शुक्र19:0620:17रात
बुध20:1721:29रात
चंद्र21:2922:41रात
शनि22:4123:53रात
गुरु23:5301:05रात
मंगल01:0502:17रात
सूर्य02:1703:29रात
शुक्र03:2904:40रात
बुध04:4005:52रात
चंद्र05:5207:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
23 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2182° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।