9 नवंबर 2026 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 9 नवंबर 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 9 नवंबर 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (00:30, 10 नव॰ तक), नक्षत्र विशाखा (19:49 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 16:39 पर है। राहुकाल 08:17 से 09:29 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 16:39
रात 07:07 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:30 तक
द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा, 19:49 तक
अनुराधा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 नवंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 00:30, 10 नव॰ तक
शुक्ल द्वितीया 02:23, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 19:49 तक
अनुराधा 22:08, 10 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 13:27 तक
शोभन 13:39, 10 नव॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 11:43 तक
बव 00:30, 10 नव॰ तक
बालव 13:24, 10 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 13:18 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
16:39
चंद्रोदय
07:55
चंद्रास्त
16:23
दिनमान
9h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
08:17 – 09:29
यमगंड
10:41 – 11:52
गुलिक काल
13:04 – 14:16

9 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:05 – 08:17शुभ
काल08:17 – 09:29टालें
शुभ09:29 – 10:41शुभ
रोग10:41 – 11:52टालें
उद्वेग11:52 – 13:04टालें
चर13:04 – 14:16सामान्य
लाभ14:16 – 15:28शुभ
अमृत15:28 – 16:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:39 – 18:28सामान्य
रोग18:28 – 20:16टालें
काल20:16 – 22:05टालें
लाभ22:05 – 23:53शुभ
उद्वेग23:53 – 01:42टालें
शुभ01:42 – 03:30शुभ
अमृत03:30 – 05:18शुभ
चर05:18 – 07:07सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0507:53दिन
शनि07:5308:41दिन
गुरु08:4109:29दिन
मंगल09:2910:17दिन
सूर्य10:1711:05दिन
शुक्र11:0511:52दिन
बुध11:5212:40दिन
चंद्र12:4013:28दिन
शनि13:2814:16दिन
गुरु14:1615:04दिन
मंगल15:0415:52दिन
सूर्य15:5216:39दिन
शुक्र16:3917:52रात
बुध17:5219:04रात
चंद्र19:0420:16रात
शनि20:1621:29रात
गुरु21:2922:41रात
मंगल22:4123:53रात
सूर्य23:5301:05रात
शुक्र01:0502:18रात
बुध02:1803:30रात
चंद्र03:3004:42रात
शनि04:4205:55रात
गुरु05:5507:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2322° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।