31 जनवरी 2027 को सिएटल का पंचांग

रविवार, 31 जनवरी 2027, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

रविवार, 31 जनवरी 2027 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (19:11 तक), नक्षत्र अनुराधा (16:58 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:37 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 15:57 से 17:08 तक है।

दिन और रात
दिन 07:37 – 17:08
रात 07:35 तक
तिथि
दशमी, 19:11 तक
एकादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 16:58 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 19:11 तक
कृष्ण एकादशी 21:40, 1 फ़र॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 19:51, 1 फ़र॰ तक
योग
ध्रुव 03:26, 1 फ़र॰ तक
व्याघातअशुभ 04:17, 2 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 19:11 तक
बव 08:24, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:37
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
03:42
चंद्रास्त
11:34
दिनमान
9h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:41 – 06:39
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
15:57 – 17:08
यमगंड
12:23 – 13:34
गुलिक काल
14:45 – 15:57

31 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:37 – 08:48टालें
चर08:48 – 10:00सामान्य
लाभ10:00 – 11:11शुभ
अमृत11:11 – 12:23शुभ
काल12:23 – 13:34टालें
शुभ13:34 – 14:45शुभ
रोग14:45 – 15:57टालें
उद्वेग15:57 – 17:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:08 – 18:57शुभ
अमृत18:57 – 20:45शुभ
चर20:45 – 22:34सामान्य
रोग22:34 – 00:22टालें
काल00:22 – 02:10टालें
लाभ02:10 – 03:59शुभ
उद्वेग03:59 – 05:47टालें
शुभ05:47 – 07:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:3708:24दिन
शुक्र08:2409:12दिन
बुध09:1210:00दिन
चंद्र10:0010:47दिन
शनि10:4711:35दिन
गुरु11:3512:23दिन
मंगल12:2313:10दिन
सूर्य13:1013:58दिन
शुक्र13:5814:45दिन
बुध14:4515:33दिन
चंद्र15:3316:21दिन
शनि16:2117:08दिन
गुरु17:0818:21रात
मंगल18:2119:33रात
सूर्य19:3320:45रात
शुक्र20:4521:57रात
बुध21:5723:10रात
चंद्र23:1000:22रात
शनि00:2201:34रात
गुरु01:3402:46रात
मंगल02:4603:59रात
सूर्य03:5905:11रात
शुक्र05:1106:23रात
बुध06:2307:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2354° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।