4 नवंबर 2028 को सिएटल का पंचांग

शनिवार, 4 नवंबर 2028, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शनिवार, 4 नवंबर 2028 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (04:03, 5 नव॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (01:17, 5 नव॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:59 पर और सूर्यास्त 17:46 पर है। राहुकाल 10:25 से 11:39 तक है।

दिन और रात
दिन 07:59 – 17:46
रात 07:00 तक
तिथि
तृतीया, 04:03 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 01:17 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 04:03, 5 नव॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 04:13, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 01:17, 5 नव॰ तक
मृगशिरा 01:07, 6 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 01:42, 5 नव॰ तक
शिव 00:44, 6 नव॰ तक
करण
वणिज 16:49 तक
विष्टि (भद्रा) 04:03, 5 नव॰ तक
बव 16:11, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:59
सूर्यास्त
17:46
चंद्रोदय
18:57
चंद्रास्त
10:43
दिनमान
9h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
06:05 – 07:02
अभिजीत मुहूर्त
12:33 – 13:12

अशुभ समय

राहुकाल
10:25 – 11:39
यमगंड
14:06 – 15:19
गुलिक काल
07:59 – 09:12

4 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:59 – 09:12टालें
शुभ09:12 – 10:25शुभ
रोग10:25 – 11:39टालें
उद्वेग11:39 – 12:52टालें
चर12:52 – 14:06सामान्य
लाभ14:06 – 15:19शुभ
अमृत15:19 – 16:32शुभ
काल16:32 – 17:46टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:46 – 19:32शुभ
उद्वेग19:32 – 21:19टालें
शुभ21:19 – 23:06शुभ
अमृत23:06 – 00:53शुभ
चर00:53 – 01:40सामान्य
रोग01:40 – 03:26टालें
काल03:26 – 05:13टालें
लाभ05:13 – 07:00शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:5908:47दिन
गुरु08:4709:36दिन
मंगल09:3610:25दिन
सूर्य10:2511:14दिन
शुक्र11:1412:03दिन
बुध12:0312:52दिन
चंद्र12:5213:41दिन
शनि13:4114:30दिन
गुरु14:3015:19दिन
मंगल15:1916:08दिन
सूर्य16:0816:57दिन
शुक्र16:5717:46दिन
बुध17:4618:57रात
चंद्र18:5720:08रात
शनि20:0821:19रात
गुरु21:1922:30रात
मंगल22:3023:42रात
सूर्य23:4200:53रात
शुक्र00:5301:04रात
बुध01:0402:15रात
चंद्र02:1503:26रात
शनि03:2604:38रात
गुरु04:3805:49रात
मंगल05:4907:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2600° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।