17 जनवरी 2029 को सिएटल का पंचांग

बुधवार, 17 जनवरी 2029, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

बुधवार, 17 जनवरी 2029 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (12:44 तक), नक्षत्र शतभिषा (09:02, 18 जन॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 07:50 पर और सूर्यास्त 16:48 पर है। राहुकाल 12:19 से 13:27 तक है।

दिन और रात
दिन 07:50 – 16:48
रात 07:50 तक
तिथि
तृतीया, 12:44 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जनवरी 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 12:44 तक
शुक्ल चतुर्थी 14:47, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:02, 18 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 18:26 तक
वरीयान 18:56, 18 जन॰ तक
करण
गर 12:44 तक
वणिज 01:42, 18 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:47, 18 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:50
सूर्यास्त
16:48
चंद्रोदय
09:02
चंद्रास्त
20:28
दिनमान
8h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:50 – 06:50
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:19 – 13:27
यमगंड
08:58 – 10:05
गुलिक काल
11:12 – 12:19

17 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:50 – 08:58शुभ
अमृत08:58 – 10:05शुभ
काल10:05 – 11:12टालें
शुभ11:12 – 12:19शुभ
रोग12:19 – 13:27टालें
उद्वेग13:27 – 14:34टालें
चर14:34 – 15:41सामान्य
लाभ15:41 – 16:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:48 – 18:41टालें
शुभ18:41 – 20:34शुभ
अमृत20:34 – 22:26शुभ
चर22:26 – 00:19सामान्य
रोग00:19 – 02:12टालें
काल02:12 – 04:04टालें
लाभ04:04 – 05:57शुभ
उद्वेग05:57 – 07:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:5008:35दिन
चंद्र08:3509:20दिन
शनि09:2010:05दिन
गुरु10:0510:50दिन
मंगल10:5011:35दिन
सूर्य11:3512:19दिन
शुक्र12:1913:04दिन
बुध13:0413:49दिन
चंद्र13:4914:34दिन
शनि14:3415:19दिन
गुरु15:1916:03दिन
मंगल16:0316:48दिन
सूर्य16:4818:03रात
शुक्र18:0319:18रात
बुध19:1820:34रात
चंद्र20:3421:49रात
शनि21:4923:04रात
गुरु23:0400:19रात
मंगल00:1901:34रात
सूर्य01:3402:49रात
शुक्र02:4904:04रात
बुध04:0405:19रात
चंद्र05:1906:35रात
शनि06:3507:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2628° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।