16 जनवरी 2029 को सिएटल का पंचांग

मंगलवार, 16 जनवरी 2029, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

मंगलवार, 16 जनवरी 2029 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (11:07 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (06:37, 17 जन॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:51 पर और सूर्यास्त 16:47 पर है। राहुकाल 14:33 से 15:40 तक है।

दिन और रात
दिन 07:51 – 16:47
रात 07:50 तक
तिथि
द्वितीया, 11:07 तक
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 06:37 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 11:07 तक
शुक्ल तृतीया 12:44, 17 जन॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 06:37, 17 जन॰ तक
शतभिषा 09:02, 18 जन॰ तक
योग
सिद्धि 18:15 तक
व्यतीपातअशुभ 18:26, 17 जन॰ तक
करण
कौलव 11:07 तक
तैतिल 23:52 तक
गर 12:44, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 17:34 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:51
सूर्यास्त
16:47
चंद्रोदय
08:42
चंद्रास्त
19:22
दिनमान
8h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:50 – 06:51
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
14:33 – 15:40
यमगंड
10:05 – 11:12
गुलिक काल
12:19 – 13:26

16 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:51 – 08:58टालें
उद्वेग08:58 – 10:05टालें
चर10:05 – 11:12सामान्य
लाभ11:12 – 12:19शुभ
अमृत12:19 – 13:26शुभ
काल13:26 – 14:33टालें
शुभ14:33 – 15:40शुभ
रोग15:40 – 16:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:47 – 18:40टालें
लाभ18:40 – 20:33शुभ
उद्वेग20:33 – 22:26टालें
शुभ22:26 – 00:19शुभ
अमृत00:19 – 02:12शुभ
चर02:12 – 04:05सामान्य
रोग04:05 – 05:58टालें
काल05:58 – 07:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:5108:36दिन
सूर्य08:3609:20दिन
शुक्र09:2010:05दिन
बुध10:0510:50दिन
चंद्र10:5011:34दिन
शनि11:3412:19दिन
गुरु12:1913:04दिन
मंगल13:0413:48दिन
सूर्य13:4814:33दिन
शुक्र14:3315:17दिन
बुध15:1716:02दिन
चंद्र16:0216:47दिन
शनि16:4718:02रात
गुरु18:0219:17रात
मंगल19:1720:33रात
सूर्य20:3321:48रात
शुक्र21:4823:03रात
बुध23:0300:19रात
चंद्र00:1901:34रात
शनि01:3402:49रात
गुरु02:4904:05रात
मंगल04:0505:20रात
सूर्य05:2006:35रात
शुक्र06:3507:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2628° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।