22 जनवरी 2029 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 22 जनवरी 2029, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 22 जनवरी 2029 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (00:27, 23 जन॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (20:26 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:46 पर और सूर्यास्त 16:55 पर है। राहुकाल 08:55 से 10:03 तक है।

दिन और रात
दिन 07:46 – 16:55
रात 07:45 तक
तिथि
अष्टमी, 00:27 तक
नवमी
नक्षत्र
अश्विनी, 20:26 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 00:27, 23 जन॰ तक
शुक्ल नवमी 02:13, 24 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 22:45, 23 जन॰ तक
योग
साध्य 21:56 तक
शुभ 22:12, 23 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:23 तक
बव 00:27, 23 जन॰ तक
बालव 13:24, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:46
सूर्यास्त
16:55
चंद्रोदय
10:36
चंद्रास्त
00:46
दिनमान
9h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:47 – 06:47
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
08:55 – 10:03
यमगंड
11:12 – 12:21
गुलिक काल
13:29 – 14:38

22 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:46 – 08:55शुभ
काल08:55 – 10:03टालें
शुभ10:03 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:21टालें
उद्वेग12:21 – 13:29टालें
चर13:29 – 14:38सामान्य
लाभ14:38 – 15:47शुभ
अमृत15:47 – 16:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:55 – 18:47सामान्य
रोग18:47 – 20:38टालें
काल20:38 – 22:29टालें
लाभ22:29 – 00:20शुभ
उद्वेग00:20 – 02:12टालें
शुभ02:12 – 04:03शुभ
अमृत04:03 – 05:54शुभ
चर05:54 – 07:45सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:4608:32दिन
शनि08:3209:18दिन
गुरु09:1810:03दिन
मंगल10:0310:49दिन
सूर्य10:4911:35दिन
शुक्र11:3512:21दिन
बुध12:2113:07दिन
चंद्र13:0713:52दिन
शनि13:5214:38दिन
गुरु14:3815:24दिन
मंगल15:2416:10दिन
सूर्य16:1016:55दिन
शुक्र16:5518:10रात
बुध18:1019:24रात
चंद्र19:2420:38रात
शनि20:3821:52रात
गुरु21:5223:06रात
मंगल23:0600:20रात
सूर्य00:2001:34रात
शुक्र01:3402:49रात
बुध02:4904:03रात
चंद्र04:0305:17रात
शनि05:1706:31रात
गुरु06:3107:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2630° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।