3 अक्टूबर 2029 को सिएटल का पंचांग

बुधवार, 3 अक्टूबर 2029, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

बुधवार, 3 अक्टूबर 2029 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (00:32, 4 अक्टू॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (02:05, 4 अक्टू॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 07:11 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 12:57 से 14:24 तक है।

दिन और रात
दिन 07:11 – 18:43
रात 07:13 तक
तिथि
एकादशी, 00:32 तक
द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 02:05 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:32, 4 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 22:16, 4 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 02:05, 4 अक्टू॰ तक
मघा 00:30, 5 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 14:34 तक
साध्य 11:53, 4 अक्टू॰ तक
करण
बव 13:22 तक
बालव 00:32, 4 अक्टू॰ तक
कौलव 11:29, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 02:05, 4 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:11
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
02:03
चंद्रास्त
16:28
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:32 – 06:22
अभिजीत मुहूर्त
12:34 – 13:20 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:57 – 14:24
यमगंड
08:38 – 10:04
गुलिक काल
11:31 – 12:57

3 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:11 – 08:38शुभ
अमृत08:38 – 10:04शुभ
काल10:04 – 11:31टालें
शुभ11:31 – 12:57शुभ
रोग12:57 – 14:24टालें
उद्वेग14:24 – 15:50टालें
चर15:50 – 17:17सामान्य
लाभ17:17 – 18:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:43 – 20:17टालें
शुभ20:17 – 21:51शुभ
अमृत21:51 – 23:24शुभ
चर23:24 – 00:58सामान्य
रोग00:58 – 02:32टालें
काल02:32 – 04:05टालें
लाभ04:05 – 05:39शुभ
उद्वेग05:39 – 07:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:1108:09दिन
चंद्र08:0909:07दिन
शनि09:0710:04दिन
गुरु10:0411:02दिन
मंगल11:0212:00दिन
सूर्य12:0012:57दिन
शुक्र12:5713:55दिन
बुध13:5514:53दिन
चंद्र14:5315:50दिन
शनि15:5016:48दिन
गुरु16:4817:46दिन
मंगल17:4618:43दिन
सूर्य18:4319:46रात
शुक्र19:4620:48रात
बुध20:4821:51रात
चंद्र21:5122:53रात
शनि22:5323:55रात
गुरु23:5500:58रात
मंगल00:5802:00रात
सूर्य02:0003:03रात
शुक्र03:0304:05रात
बुध04:0505:08रात
चंद्र05:0806:10रात
शनि06:1007:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
10 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2727° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।