29 अक्टूबर 2027 को सिएटल का पंचांग

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (05:22, 30 अक्टू॰ तक), नक्षत्र स्वाति (21:13 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:48 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 11:36 से 12:52 तक है।

दिन और रात
दिन 07:48 – 17:56
रात 07:50 तक
तिथि
प्रतिपदा, 05:22 तक
द्वितीया
नक्षत्र
स्वाति, 21:13 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 05:22, 30 अक्टू॰ तक
शुक्ल द्वितीया 04:43, 31 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 21:13 तक
विशाखा 21:01, 30 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 12:04 तक
आयुष्मान 10:00, 30 अक्टू॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 17:55 तक
बव 05:22, 30 अक्टू॰ तक
बालव 16:58, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:48
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
08:16
चंद्रास्त
17:33
दिनमान
10h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:58 – 06:53
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:12

अशुभ समय

राहुकाल
11:36 – 12:52
यमगंड
15:24 – 16:40
गुलिक काल
09:04 – 10:20

29 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:48 – 09:04सामान्य
लाभ09:04 – 10:20शुभ
अमृत10:20 – 11:36शुभ
काल11:36 – 12:52टालें
शुभ12:52 – 14:08शुभ
रोग14:08 – 15:24टालें
उद्वेग15:24 – 16:40टालें
चर16:40 – 17:56सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:56 – 19:40टालें
काल19:40 – 21:25टालें
लाभ21:25 – 23:09शुभ
उद्वेग23:09 – 00:53टालें
शुभ00:53 – 02:37शुभ
अमृत02:37 – 04:21शुभ
चर04:21 – 06:06सामान्य
रोग06:06 – 07:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:4808:39दिन
बुध08:3909:30दिन
चंद्र09:3010:20दिन
शनि10:2011:11दिन
गुरु11:1112:02दिन
मंगल12:0212:52दिन
सूर्य12:5213:43दिन
शुक्र13:4314:33दिन
बुध14:3315:24दिन
चंद्र15:2416:15दिन
शनि16:1517:05दिन
गुरु17:0517:56दिन
मंगल17:5619:06रात
सूर्य19:0620:15रात
शुक्र20:1521:25रात
बुध21:2522:34रात
चंद्र22:3423:43रात
शनि23:4300:53रात
गुरु00:5302:02रात
मंगल02:0203:12रात
सूर्य03:1204:21रात
शुक्र04:2105:31रात
बुध05:3106:40रात
चंद्र06:4007:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2458° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।