30 अक्टूबर 2027 को सिएटल का पंचांग

शनिवार, 30 अक्टूबर 2027, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (04:43, 31 अक्टू॰ तक), नक्षत्र विशाखा (21:01 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 07:50 पर और सूर्यास्त 17:54 पर है। राहुकाल 10:21 से 11:37 तक है।

दिन और रात
दिन 07:50 – 17:54
रात 07:51 तक
तिथि
द्वितीया, 04:43 तक
तृतीया
नक्षत्र
विशाखा, 21:01 तक
अनुराधा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 04:43, 31 अक्टू॰ तक
शुक्ल तृतीया 04:45, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 21:01 तक
अनुराधा 21:27, 31 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 10:00 तक
सौभाग्य 08:26, 31 अक्टू॰ तक
करण
बालव 16:58 तक
कौलव 04:43, 31 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:39, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 15:01 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:50
सूर्यास्त
17:54
चंद्रोदय
09:34
चंद्रास्त
18:05
दिनमान
10h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:59 – 06:54
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:12

अशुभ समय

राहुकाल
10:21 – 11:37
यमगंड
14:08 – 15:23
गुलिक काल
07:50 – 09:05

30 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:50 – 09:05टालें
शुभ09:05 – 10:21शुभ
रोग10:21 – 11:37टालें
उद्वेग11:37 – 12:52टालें
चर12:52 – 14:08सामान्य
लाभ14:08 – 15:23शुभ
अमृत15:23 – 16:39शुभ
काल16:39 – 17:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:54 – 19:39शुभ
उद्वेग19:39 – 21:24टालें
शुभ21:24 – 23:08शुभ
अमृत23:08 – 00:53शुभ
चर00:53 – 02:38सामान्य
रोग02:38 – 04:22टालें
काल04:22 – 06:07टालें
लाभ06:07 – 07:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:5008:40दिन
गुरु08:4009:31दिन
मंगल09:3110:21दिन
सूर्य10:2111:11दिन
शुक्र11:1112:02दिन
बुध12:0212:52दिन
चंद्र12:5213:43दिन
शनि13:4314:33दिन
गुरु14:3315:23दिन
मंगल15:2316:14दिन
सूर्य16:1417:04दिन
शुक्र17:0417:54दिन
बुध17:5419:04रात
चंद्र19:0420:14रात
शनि20:1421:24रात
गुरु21:2422:33रात
मंगल22:3323:43रात
सूर्य23:4300:53रात
शुक्र00:5302:03रात
बुध02:0303:12रात
चंद्र03:1204:22रात
शनि04:2205:32रात
गुरु05:3206:42रात
मंगल06:4207:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2458° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।